समय का प्रबंधन भाग-3

तीसरा बुनियादी सवाल : आपका समय कितना क़ीमती है?

समय आपके जीवन का सिक्का है। यह आपके पास मौजूद इकलौता सिक्का है और सिर्फ़ आप ही यह तय कर सकते हैं कि इसे कैसे ख़र्च किया जाए। सतर्क रहें, वरना आपके बजाय दूसरे लोग इसे ख़र्च कर देंगे।

— कार्ल सैंडबर्ग

कहा जाता है, ‘समय ही धन है।’ परंतु यह कहावत पूरी तरह सच नहीं है। सच तो यह है कि समय सिर्फ़ संभावित धन है। अगर आप अपने समय का सदुपयोग करते हैं, तभी आप धन कमा सकते हैं। दूसरी ओर, अगर आप अपने समय का दुरुपयोग करते हैं, तो आप धन कमाने की संभावना को गँवा देते हैं।

क्या आप ठीक–ठीक जानते हैं कि आपका समय कितना क़ीमती है? अगर नहीं, तो नीचे दिए फ़ॉर्मूले का प्रयोग करके यह जान लें –

समय का मूल्य ज्ञात करने का फ़ॉर्मूला :

आपके एक घंटे का मूल्य = आपकी आमदनी/काम के घंटे

अपनी आमदनी में काम के घंटों का भाग देने से आप जान जाएँगे कि आपके एक घंटे के समय का वर्तमान मूल्य क्या है।

मान लें, आप हर महीने 20,000 रुपए कमाते हैं और इसके लिए आप महीने में 25 दिन 8 घंटे काम करते हैं। यानी आप कुल मिलाकर 200 घंटे काम करते हैं। इस स्थिति में आपके एक घंटे का मूल्य होगा : 20,000 (आमदनी) / 200 (काम के घंटे) = 100 रुपए।

इस उदाहरण में यदि आप रोज़ 1 घंटे का समय बर्बाद करते हैं, तो आपको हर दिन 100 रुपए का नुक़सान हो रहा है, यानी एक साल में 36,000 रुपए। यदि आप हर दिन दो घंटे बर्बाद करते हैं, तो इसका मतलब है कि आपको हर साल 72,000 रुपए का नुक़सान हो रहा है। यह अभ्यास करने के बाद आपकी आँखें खुल जाएँगी। इससे एक तो आपको यह पता चल जाएगा कि समय की बर्बादी करने से आपको कितना आर्थिक नुक़सान हो रहा है, इसलिए आप समय बर्बाद नहीं करेंगे। दूसरे, इससे अगर आपको यह आभास होता है कि आपके समय का वर्तमान मूल्य संतोषजनक नहीं है, तो आप उसे बढ़ाने के उपाय खोजने लगेंगे।

इस फ़ॉर्मूले का सिर्फ़ एक बार प्रयोग करने से ही आपके जीवन में चमत्कारिक परिवर्तन हो जाएगा। आप समय के उपयोग को लेकर सतर्क हो जाएँगे। आप समय बर्बाद करना छोड़ देंगे। आप अपने समय के बेहतर उपयोग के तरीक़े खोजने लगेंगे। आप कम समय में ज़्यादा काम करने के उपाय खोजने लगेंगे। और यह सब केवल इसलिए होगा, क्योंकि अब आपको पता चल चुका है कि आपके काम का हर मिनट कितना क़ीमती है और उसे बर्बाद करके आप अपना कितना आर्थिक नुक़सान कर रहे हैं।

आधुनिक मनुष्य उन चीज़ों को ख़रीदने लायक़ पैसा कमाने के पीछे पागल है, जिनका आनंद वह व्यस्तता के कारण नहीं ले सकता।

— फ़्रैंक ए. क्लार्क

जिन चीज़ों को मनुष्य ख़र्च कर सकता है, उनमें समय सबसे मूल्यवान है।

– थियोफ्रे़स्टस

समय का प्रबंधन भाग-2

दूसरा बुनियादी सवाल : आपके पास दरअसल कितना समय है?

आप यह कैसे कह सकते हैं कि आपके पास पर्याप्त समय नहीं है? आपके पास एक दिन में उतने ही घंटे हैं, जितने हेलन केलर, लुई पाश्चर, माइकल एन्जेलो, मदर टेरेसा, लियोनार्डो द विंची, थॉमस जेफ़रसन और अल्बर्ट आइंस्टाइन के पास थे।

— एच. जैकसन ब्राउन

विधाता ने किसी को सुंदरता ज़्यादा दी है, किसी को कम दी है। किसी को बुद्धि ज़्यादा दी है, किसी को कम दी है। किसी को दौलत ज़्यादा दी है, किसी को कम दी है। लेकिन समय उसने सबको बराबर दिया है : एक दिन में 24 घंटे। समय ही एकमात्र ऐसी दौलत है, जिसे आप बैंक में जमा नहीं कर सकते। समय का गुज़रना आपके हाथ में नहीं होता। यह तो घड़ी की सुई के साथ लगातार आपके हाथ से फिसलता रहता है। आपके हाथ में तो बस इतना रहता है कि आप इस समय का कैसा उपयोग करते हैं। अगर सदुपयोग करेंगे, तो अच्छे परिणाम मिलेंगे; अगर दुरुपयोग करेंगे, तो बुरे परिणाम मिलेंगे।

ध्यान देने वाली बात यह है कि हमारे पास कहने को तो 24 घंटे होते हैं, लेकिन वास्तव में इतना समय हमारे हाथ में नहीं होता। सच तो यह है कि समय के एक बड़े हिस्से पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं होता। 8 घंटे नींद में चले जाते हैं और 2 घंटे खाने–पीने, तैयार होने एवं नित्य कर्म आदि में चले जाते हैं। यानी हमारे हाथ में दरअसल 14 घंटे का समय ही होता है। दूसरे शब्दों में, जीवन में सिर्फ़ 58 प्रतिशत समय पर हमारा नियंत्रण संभव है, जबकि 42 प्रतिशत समय हमारे नियंत्रण से बाहर होता है। सुविधा की दृष्टि से यह मान लें कि 40 प्रतिशत समय पर हमारा नियंत्रण नहीं होता, जबकि 60 प्रतिशत समय पर होता है।

इस संदर्भ में सदियों पहले भर्तृहरि की कही गई बात आज भी प्रासंगिक है, ‘विधाता ने मनुष्य की आयु 100 वर्ष तय की है, जिसमें से आधी रात्रि में चली जाती है, बची आधी में से भी आधी बाल्यावस्था और वृद्धावस्था में गुज़र जाती है और बाक़ी बचे 25 वर्षों में मनुष्य को रोग और वियोग के अनेक दुख झेलने पड़ते हैं और नौकरी–चाकरी करनी पड़ती है। इसलिए हम यह कह सकते हैं कि जलतरंग के समान चंचल इस जीवन में लेश मात्र सुख भी नहीं है।’

समय अनमोल है, क्योंकि वास्तव में समय ही संसार की एकमात्र ऐसी चीज़ है, जो सीमित है। अगर आप दौलत गँवा देते हैं, तो दोबारा कमा सकते हैं। घर गँवा देते हैं, तो दोबारा पा सकते हैं। लेकिन अगर समय गँवा देते हैं, तो आपको वही समय दोबारा नहीं मिल सकता। हमारे पास जीवन में बहुत कम समय है और यह समय सीमित है। यदि हम अपनी अपेक्षित आयु सौ वर्ष मान लें, तो हमारे पास जीवन में कुल 36,500 दिन ही होते हैं। इसी समय हिसाब लगाकर देखें कि इन 36,500 दिनों में से आपके पास कितने दिन बचे हैं, जिनमें आपको अपने जीवन का लक्ष्य प्राप्त करना है? नीचे दी गई आसान गणना करके ख़ुद जान लें कि आपके पास अब लगभग कितने दिन बचे हैं –

खोई दौलत मेहनत से दोबारा हासिल की जा सकती है, खोया ज्ञान अध्ययन से, खोया स्वास्थ्य चिकित्सा या संयम से; लेकिन खोया समय हमेशा–हमेशा के लिए चला जाता है।

— सेम्युअल स्माइल्स

अगर हम जीवन में कुछ करना, कुछ बनना, कुछ पाना चाहते हैं, तो यह अनिवार्य है कि हम समय का सर्वश्रेष्ठ उपयोग करना सीख लें, ताकि इस धरती पर अपने सीमित समय में हम वह सब हासिल कर सकें, जो हम हासिल करना चाहते हैं – चाहे वह दौलत या शोहरत हो, सुख या सफलता हो।

कैलेंडर से धोखा न खाएँ। साल भर में केवल उतने ही दिन होते हैं, जिनका आप उपयोग करते हैं। एक व्यक्ति साल भर में केवल एक सप्ताह का मूल्य प्राप्त करता है, जबकि दूसरा व्यक्ति एक सप्ताह में ही पूरे साल का मूल्य प्राप्त कर लेता है।

— चार्ल्स रिचड्‌र्स

समय का प्रबंधन भाग-1

पहला बुनियादी सवाल : आजकल समय की इतनी कमी क्यों महसूस होती है?

दिन (सं.) चौबीस घंटों की अवधि, जिसमें से अधिकांश बर्बाद हो जाती है।

— एम्ब्रोज़ बियर्स

क्याआपने कभी सोचा है कि आजकल हमें समय की इतनी कमी क्यों महसूस होती है? समय पर काम न करने या होने पर हम झल्ला जाते हैं, आगबबूला हो जाते हैं, चिढ़ जाते हैं, तनाव में आ जाते हैं। समय की कमी के चलते हम लगभग हर पल जल्दबाज़ी और हड़बड़ी में रहते हैं। इस चक्कर में हमारा ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है, लोगों से हमारे संबंध ख़राब हो जाते हैं, हमारा मानसिक संतुलन गड़बड़ा जाता है और कई बार तो दुर्घटनाएँ भी हो जाती हैं। समय की कमी हमारे जीवन का एक अप्रिय और अनिवार्य हिस्सा बन चुकी है।

क्या आपने कभी यह बात सोची है : हमारे पूर्वजों को कभी टाइम मैनेजमेंट की ज़रूरत नहीं पड़ी, तो फिर हमें क्यों पड़ रही है? क्या हमारे पूर्वजों को दिन में 48 घंटे मिलते थे और हमें केवल 24 घंटे ही मिल रहे हैं? आप भी जानते हैं और मैं भी जानता हूँ कि ऐसा नहीं है! हर पीढ़ी को एक दिन में 24 घंटे का समय ही मिला है। लेकिन बीसवीं सदी की शुरुआत से हमारे जीवन में समय कम पड़ने लगा है और यह समस्या दिनोदिन बढ़ती ही जा रही है। बड़ी अजीब बात है, क्योंकि बीसवीं सदी की शुरुआत से ही मनुष्य समय बचाने वाले नए–नए उपकरण बनाता जा रहा है।

बीसवीं सदी से पहले कार नहीं थी, मोटर साइकल या स्कूटर भी नहीं थे, लेकिन हमारे पूर्वजों को कहीं पहुँचने की जल्दी भी नहीं थी। पहले मिक्सर, फ़ूड प्रोसेसर या माइक्रोवेव नहीं थे, लेकिन गृहिणियाँ सिल पर मसाला पीसने या चूल्हे पर खाना पकाने में किसी तरह की हड़बड़ी नहीं दिखाती थीं। पहले बिजली नहीं थी, लेकिन किसी को रात–रात भर जागकर काम करने की ज़रूरत भी नहीं थी। वास्तव में तब जीवन ज़्यादा सरल था, क्योंकि उस समय इंसान की ज़िंदगी घड़ी के हिसाब से नहीं चलती थी। औद्योगिक युग के बाद फ़ैक्ट्री, अॉफ़िस और नौकरी का जो दौर शुरू हुआ, उसने मनुष्य को घड़ी का ग़ुलाम बनाकर रख दिया।

पहले जीवन सरल था और अब जटिल हो चुका है : यही हमारी समस्या का मूल कारण है। पहले जीवन की रफ़्तार धीमी थी, लेकिन अब तेज़ हो चुकी है। अब हमारे जीवन में इंटरनेट आ गया है, जो पलक झपकते ही हमें दुनिया से जोड़ देता है। अब हमारे जीवन में टी.वी. आ चुका है, जिसका बटन दबाते ही हम दुनिया की ख़बरें जान लेते हैं। अब हमारे पास कारें और हवाई जहाज़ हैं, जिनसे हम तेज़ी से कहीं भी पहुँच सकते हैं। अब हमारे पास थ्री–जी मोबाइल्स हैं, जिनसे हम दुनिया में कहीं भी, किसी से भी बात कर सकते हैं और उसे देख भी सकते हैं। आधुनिक आविष्कारों ने हमारे जीवन की गति बढ़ा दी है। शायद आधुनिक आविष्कार ही हमारे जीवन में समय की कमी का सबसे बड़ा कारण हैं। इनकी बदौलत हम दुनिया से तो जुड़ गए हैं, लेकिन शायद खुद से दूर हो गए हैं।

कई बार सवाल जवाबों से ज़्यादा महत्वपूर्ण होते हैं।

— नैन्सी विलार्ड

यदि आप समय के सर्वश्रेष्ठ उपयोग को लेकर गंभीर हैं, तो इसका सबसे सीधा समाधान यह है : यदि आप किसी तरह आधुनिक आविष्कारों से मुक्ति पा लें और दोबारा पुराने ज़माने की जीवनशैली अपना लें, तो आपको काफ़ी सुविधा होगी। नहीं, नहीं… मैं यहाँ चूल्हे पर रोटी पकाने या मुंबई से दिल्ली तक पैदल जाने की बात नहीं कर रहा हूँ। मैं तो केवल यह कहना चाहता हूँ कि मोबाइल, टी.वी., इंटरनेट, चैटिंग आदि समय बर्बाद करने वाले आविष्कारों का इस्तेमाल कम कर दें।

पहले घड़ी हमारे जीवन पर हावी नहीं हुई थी और इसका सीधा सा कारण यह था कि ज़्यादातर लोगों के पास घड़ी थी ही नहीं। पहले अलार्म घड़ी की कोई ज़रूरत नहीं थी, मुर्गे की बाँग ही काफ़ी थी। तब 8:18 की लोकल पकड़ने का कोई तनाव नहीं रहता था। तब कोई काम सुबह नौ बजे हो या सवा नौ बजे, कोई ख़ास फ़र्क़ नहीं पड़ता था… लेकिन आज पड़ता है।

दुनिया बहुत तेज़ी से बदल रही है। अब बड़े छोटों को नहीं हराएँगे; अब तो तेज़ धीमों को हराएँगे।

— रूपर्ट मरडॉक

तो इस पुस्तक को आगे पढ़ने से पहले यह बात अच्छी तरह से समझ लें कि डाइबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और हृदय रोग की तरह ही समय की कमी भी एक आधुनिक समस्या है, जो आधुनिक जीवनशैली का परिणाम है। यदि आप इस समस्या को सुलझाना चाहते हैं, तो आपको अपनी जीवनशैली को बदलना होगा। याद रखें, दुनिया नहीं बदलेगी; बदलना तो आपको ही है। यदि आप अपनी जीवनशैली और सोच को बदल लेंगे, तो समय का समीकरण भी बदल जाएगा। जैसा अल्बर्ट आइंस्टाइन ने कहा था, ‘हम जिन महत्वपूर्ण समस्याओं का सामना करते हैं, उन्हें सोच के उसी स्तर पर नहीं सुलझाया जा सकता, जिस पर हमने उन्हें उत्पन्न किया था।’

अब गेंद आपके पाले में है! अपनी सोच बदलें, जीवनशैली बदलें और समय का उचित प्रबंधन करके अपना जीवन बदल लें। इस संदर्भ में आधुनिक प्रबंधन के पितामह पीटर एफ़. ड्रकर की बात याद रखें, ‘जब तक हम समय का प्रबंधन नहीं कर सकते, तब तक हम किसी भी चीज़ का प्रबंधन नहीं कर सकते।’

आधुनिक औद्योगिक युग की सबसे प्रमुख मशीन भाप का इंजन नहीं, बल्कि घड़ी है।

— लुइस ममफ़ोर्ड

समय से संबंधित तथ्य

समय से संबंधित तथ्य

  1. इस पूरे संसार में सिर्फ़ एक ही कोना है, जिसे सुधारना पूरी तरह से आपके हाथ में है — और वह है आप स्वयं।— आल्डस हक्सले
  2. अगर आप नहीं, तो फिर कौन? अगर अभी नहीं, तो फिर कब?—- अज्ञात
  3. दिन (सं.) चौबीस घंटों की अवधि, जिसमें से अधिकांश बर्बाद हो जाती है।—- एम्ब्रोज़ बियर्स
  4. कई बार सवाल जवाबों से ज़्यादा महत्वपूर्ण होते हैं।— नैन्सी विलार्ड
  5. दुनिया बहुत तेज़ी से बदल रही है। अब बड़े छोटों को नहीं हराएँगे; अब तो तेज़ धीमों को हराएँगे।— रूपर्ट मरडॉक
  6. आधुनिक औद्योगिक युग की सबसे प्रमुख मशीन भाप का इंजन नहीं, बल्कि घड़ी है।— लुइस ममफ़ोर्ड
  7. आप यह कैसे कह सकते हैं कि आपके पास पर्याप्त समय नहीं है? आपके पास एक दिन में उतने ही घंटे हैं, जितने हेलन केलर, लुई पाश्चर, माइकल एन्जेलो, मदर टेरेसा, लियोनार्डो द विंची, थॉमस जेफ़रसन और अल्बर्ट आइंस्टाइन के पास थे।— एच. जैकसन ब्राउन
  8. खोई दौलत मेहनत से दोबारा हासिल की जा सकती है, खोया ज्ञान अध्ययन से, खोया स्वास्थ्य चिकित्सा या संयम से; लेकिन खोया समय हमेशा–हमेशा के लिए चला जाता है।— सेम्युअल स्माइल्स
  9. कैलेंडर से धोखा न खाएँ। साल भर में केवल उतने ही दिन होते हैं, जिनका आप उपयोग करते हैं। एक व्यक्ति साल भर में केवल एक सप्ताह का मूल्य प्राप्त करता है, जबकि दूसरा व्यक्ति एक सप्ताह में ही पूरे साल का मूल्य प्राप्त कर लेता है। — चार्ल्स रिचड्‌र्स
  10. समय आपके जीवन का सिक्का है। यह आपके पास मौजूद इकलौता सिक्का है और सिर्फ़ आप ही यह तय कर सकते हैं कि इसे कैसे ख़र्च किया जाए। सतर्क रहें, वरना आपके बजाय दूसरे लोग इसे ख़र्च कर देंगे।— कार्ल सैंडबर्ग
  11. आधुनिक मनुष्य उन चीज़ों को ख़रीदने लायक़ पैसा कमाने के पीछे पागल है, जिनका आनंद वह व्यस्तता के कारण नहीं ले सकता।— फ़्रैंक ए. क्लार्क
  12. जिन चीज़ों को मनुष्य ख़र्च कर सकता है, उनमें समय सबसे मूल्यवान है। – थियोफ्रे़स्टस
  13. घड़ी को न देखते रहें; वही करें जो यह करती है। चलते रहें।— सेम्युअल लीवेन्सन
  14. सिर्फ़ वही इतिहास मूल्यवान है, जो हम आज बनाते हैं।— हेनरी फ़ोर्ड
  15. जिसे करना हमारी शक्ति में है, उसे न करना भी हमारी शक्ति में है।— अरस्तू
  16. जो लोग अपने समय का सबसे बुरा उपयोग करते हैं, वही सबसे पहले इसकी कमी का रोना रोते हैं।— जीन डे ला ब्रूयर
  17. ग़ु मशुदा होने की बात करें, तो यह समझ पाना मुश्किल है कि वे आठ घंटे कहाँ चले जाते हैं, जो आठ घंटे की नींद और आठ घंटे की नौकरी के बाद बचते हैं।— डग लार्सन
  18. लक्ष्य से आपकी योजना को आकार मिलता है, योजना से आपके कार्य तय होते हैं, कार्यों से परिणाम हासिल होते हैं और परिणाम से आपको सफलता मिलती है। और यह सब लक्ष्य से शुरू होता है।— शैड हेल्म्सटेटर
  19. अमीर बनने का मतलब है पैसा होना; बेहद अमीर बनने का मतलब है समय होना।— मार्गरेट बोनानो
  20. संसार हर उस व्यक्ति को जगह देने के लिए एक तरफ़ हट जाता है, जो जानता है कि वह कहाँ जा रहा है।— डेविड जॉर्डन
  21. अगर आपको वह फ़सल पसंद नहीं है, जो आप काट रहे हैं, तो उस बीज की जाँच करें, जो आप बो रहे हैं।— अज्ञात

ख्यालों

ख्यालों में कभी पहले हमारे हुआ नहीं ऐसे।
सुबह शाम आंखो में हमारे कोई रहा नहीं ऐसे।
धड़कने चल रही ऐसे कि उनको रोक लो कोई,
दर्द जो उठ रहा है अब कभी पहले सहा नहीं ऐसे।।।

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